वैश्विक महामारी कोरोनावायरस के राजस्थान के एपीसेंटर बने रामगंज (जयपुर )के रहने वाले अब्दुल रहमान ने चार वर्ष पूर्व बाड़मेर जिले के , धोरीमन्ना तहसील के भलीसर विद्यालय में बतौर प्रधानाचार्य जॉइन किया
वहाँ की शांत आबोहवा और आसपास के लोगों में इस्लामिक कट्टरवाद फैलाने लगा स्कूल समय के बाद यह मस्जिद (स्कूल के ठीक सामने) में गांव वालों को इकट्ठा कर तकरीरें भी करता था उसका आवास मस्जिद में ही हुआ करता था
स्कूल में सरस्वती वंदना ,राष्टगान-राष्ट्रगीत एवं गायत्री मंत्र वाचन नहीं होने देता था
तीन वर्ष पूर्व वहां गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में ध्वज फहराने के दौरान सलामी सहित , राष्ट्रगान-राष्ट्रगीत सहित सारे अनिवार्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाधा बनने के कारण गांव वालों ने शिकायत दर्ज करवाई
प्रशासन वहां आया और माफी मांगने पर उसको तब छोड़ दिया गया । तब इस कारण इसने जयपुर तबादला करवा दिया
3 वर्ष पूर्व भूणिया में कुछ मुसलमानों ने एक बैल की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर दी थी
उस घटना को लेकर एक बड़ी हिन्दू आक्रोश रैली भी हुई , मुकदमे भी दर्ज हुए ।
उस घटना में भी यह जयपुर पोस्टेड होते हुए भी भूणिया आया , लोगों को इकट्ठा करना , मीटिंग करना इत्यादि भड़काने का काम किया
पिछले डेढ़ वर्ष से जब यह कितनोरिया विद्यालय में प्रधानाचार्य लगा है तब से ही विद्यालय में सरस्वती वंदना एवं गायत्री मंत्र नहीं होने देता था
स्टाफ (अध्यापक व कर्मचारी) व गांव के लोग परेशान रहते थे
क्योंकि यह सरकारी अध्यापक की तरह नहीं मदरसे के मौलवी की तरह विद्यालय चलाता है
अभी 10-15 दिन पूर्व लॉकडाउन के दौरान ही सारे नियमों को धत्ता देते हुए , प्रशासन की आँखों में धूल झोंककर निजी वाहन से जयपुर चला गया था
इसकी कार्यशैली से वाकिफ कुछ ग्रामीणों ने प्रशासन को भी अवगत कराया कि यह अभी जयपुर गया हुआ है वापस लौटने की संभावना प्रबल है
अभी जिले में सब कुछ ठीक-ठाक चल ही रहा था कि 6 अप्रैल को वह छः जिलों की सीमाओं को तोड़ता हुआ , पुलिस व प्रशासन की सारी कमजोरियों को उजागर करता हुआ वापस तीन अन्य व्यक्तियों के साथ अपने निजी वाहन से भूणिया आ गया
प्रशासन को अवगत कराया गया
ग्रामसेवक व नर्सिंग स्टाफ को ढंग से जवाब ही नहीं दिया और वह उलझने लग गया व 108 एंबुलेंस में भी जांच हेतु नहीं बैठा
फिर उन्होंने उच्च अधिकारीयों से बात करवाई तब यह एंबुलेंस में बैठा ।और अस्पताल में जांच करवाने पर यह पॉजिटिव पाया गया ।
लॉकडाउन के दौरान जयपुर जाना इतना क्या अनिवार्य था ? अगर गया भी तो जाकर सुरक्षित वापस आ गया
इसका अर्थ यह तो नहीं है कि पीछे बहुत बड़ा राजनीतिक संरक्षण हो ? यह मदरसों में इधर-उधर घूमता रहता है और तबलीगी जमात से इसके कितने संबंध है इसकी भी पूछताछ जारी है ।